भगवद् गीता के सिद्धांत एवं महत्व, कृपया इसे ध्यान से पढ़ें!

bhagavad gita
श्रीमद् भगवद् गीता हिन्दू धर्म के बहुत ही महत्त्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है और इस महान् ग्रन्थ का वैश्विक स्तर पर भी बहुत सम्मान है।

श्रीमद् भगवद् गीता हिन्दू धर्म के बहुत ही महत्त्वपूर्ण ग्रंथों में से एक है और इस महान् ग्रन्थ का वैश्विक स्तर पर भी बहुत सम्मान है।
परन्तु भगवद् गीता के सन्दर्भ में लोगों के मन में बहुत सी गलतफहमियां भी हैं। आईये आज हम उन गलतफहमियों को दूर करने की कोशिश करते हैं।

भगवद् गीता सिर्फ बुद्धिमान ही पढ़ और समझ सकते हैं।

यह बात असत्य है। भगवद् गीता को पढ़ना एवं समझना बहुत ही सरल कार्य है। इसे पढ़ने के लिए आपका संस्कृत का ज्ञाता होना ज़रूरी नहीं है। आप केवल हिंदी पढ़कर भी इसके सिद्धांतों को समझ सकते हैं अथवा गीता रुपी ज्ञान को प्राप्त कर सकते हैं।

भगवद् गीता में केंद्रीय संदेश स्पष्ट नहीं है।

यह बात भी असत्य है। भगवद् गीता “त्वाम्” अर्थात तुम और “ईश्वर” अर्थात भगवान् के बारे में है। हम अपनी पहचान डॉक्टर, इंजीनियर,लेखक आदि के रूप में बताते हैं, जबकि ये सिर्फ सांसारिक गुण हैं। गीता के अनुसार आत्मा अमर है जिसका सीधा सम्बन्ध परमात्मा यानि ईश्वर से है।

गीता का वर्तमान समय में कोई महत्व नहीं है।

ऐसा बिलकुल भी नहीं है। गीता हमें इस संसार का सत्य बताती है। कुछ लोग समझते हैं कि गीता का महत्व सिर्फ महाभारत तक ही सीमित है, परंतु जिस प्रकार सूर्य का प्रकाश हमेशा बना रहता है, उसी प्रकार ईश्वर की कृपा भी कभी कम नहीं होती। हमारे जीवन में गीता के सिद्धांतो का बहुत महत्व है।

गीता हिंसा को बढ़ावा देती है।

बहुत लोगों के मन में यह गलत धारणा है कि भगवद् गीता हिंसा को बढ़ावा देती है। श्री कृष्णा ने कहा है,
अर्थात हमें कभी भी पाप के आगे नहीं झुकना चाहिए एवं सत्य के मार्ग पर चलना चाहिये। महात्मा गांधी ने भगवद् गीता से प्रेरित होकर ही अहिंसा का मार्ग अपनाया था, तो गीता में हिंसक विचारधारा कैसे हो सकती है ?

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