भारत के इतिहास के 10 ऐसे झूठ जिसे अब तक हम सब लोग सच मानते आए है!

इतिहास
इतिहास के किसी तथ्य को बिना किसी ठोस सबूत के आधार पर अपना लेना बेवकूफी होती है, अगर आप उस तथ्य की सही जानकारी प्राप्त करने के इक्छुक हैं

स्कूली बच्चों को बचपन से ही कई ऐसी झूठी और मनगढंत बातों का शिकार होना पड़ा जो कि वास्तविकता में सही नही है। इतिहास के किसी तथ्य को बिना किसी ठोस सबूत के आधार पर अपना लेना बेवकूफी होती है, अगर आप उस तथ्य की सही जानकारी प्राप्त करने के इक्छुक हैं तो आपको उसकी तह तक जाना पड़ता है, लेकिन हो सकता है यह आपके लिए एक चिंता का विषय बन जाये ।

आइये अब हम भारतीय इतिहास के 10 ऐसे रोचक तथ्यों को जानते है जिनका वास्तविकता में कोई अस्तित्व ही नहीं है।

1. हिंदी भारत की राष्ट्रीय भाषा है

 

इस तथ्य को सुनकर आपको अपने स्कूल के दिन याद आ रहे होंगे? वास्तव में, इसका कोई सबूत नहीं है कि हिंदी को हमारी राष्ट्रीय भाषा के रूप में घोषित किया गया था। हालांकि, भारत में स्पष्ट रूप से कोई राष्ट्रीय भाषा नहीं है, आज भारत में की कुल 23 आधिकारिक भाषाएं हैं, उनमें से एक हिंदी भी है।

2. हॉकी भारत का राष्ट्रीय खेल है

भारत के लगभग 80 प्रतिशत लोगो को लगता है कि हॉकी हमारा राष्ट्रीय खेल है। हमारी पाठ्यपुस्तकों के लिए धन्यवाद जिससे हमें इस पर विश्वास करने का मौका मिला, लेकिन आरटीआई के जवाब ने इस विश्वास को पूरी तरह से खारिज कर दिया है।

3. महात्मा गांधी ने ब्रिटिश महिला के साथ किसी पार्टी में डांस किया था

आप निष्कर्ष पर जाने से पहले जरा इस ध्यान से पढ़िए

एक ऑस्ट्रेलियाई आदमी गाँधी जी की छवि से इतना प्रभावित हुआ के उसने हूबहू गांधी जी की तरह वेशभूषा धारण कर ली उसके इस रूप को देखकर सभी को ऐसा लगने लगा की वो महात्मा गाँधी है लेकिन ये अफवाह मात्र है। शुक्र है, वह हमारे बापू नहीं हैं आप खुशी से उन्हें बापू बुलाना जारी रख सकते हैं।

4. वाराणसी दुनिया का सबसे पुराना शहर है

शहर निश्चित रूप से बहुत पुराना है लेकिन स्पष्ट रूप से सबसे पुराना नहीं है। 1100 ईसा पूर्व में वाराणसी से पहले बसे हुए 30 से अधिक शहरों में से एक है।

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5. अयोध्या रामायण के दिनों के बाद से है

अयोध्या का आधुनिक शहर वास्तव में रामायण की रहस्यमय युग को फिर से जीवित करने के उद्देश्य से राजा विक्रमादित्य द्वारा स्थापित किया गया था। नागेश्वरनाथ मंदिर की स्थापना श्री राम के पुत्र कुश ने की थी, जब श्री राम ने अयोध्या छोड़ दिया था। इस मंदिर की वजह से विक्रमादित्य को पुरातन शहर पहचानने में सहायता मिली थी।

6. “अगर आँख के बदले आँख मांगोगे, तो पूरा संसार अँधा हो जायेगा”   – महात्मा गाँधी

क्या आपका यह मानना ​​है कि महात्मा गांधी ने ही ये अनोखी लाइन कही होगी? वास्तविक जांच के समय यह पता लगा की वे बेन किंग्सले थे जिन्होंने फिल्म गांधी में की इस प्रभावशाली वाक्य को कहा था। चूंकि इसमें गांधी जी के स्वयं के शब्दों का कोई रिकॉर्ड नहीं है, इसलिए हम संवाद लेखक इसका कुछ श्रेय दे सकते हैं।

7. भारत को फीफा विश्व कप 1950 से अयोग्य घोषित कर दिया गया क्योंकि खिलाड़ियों ने नंगे पैर खेलने पर जोर दिया

फीफा 1950 में चार टीमों ने भाग लेने से पीछे हटने के बाद भारत को इस विश्वकप में जाने का मौका मिला। लेकिन जब ब्राजील का दौरा महंगा साबित हुआ और AIFF को इटली के खिलाफ खड़े होने के लिए भारतीय खिलाड़ियों की क्षमता पर कोई भरोसा नहीं था, तो उसने दौरे को रद्द कर दिया और शर्मिंदगी से बचने के लिए इस अफवाह को आगे बढ़ा दिया।

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8. मिल्खा सिंह ने रोम ओलंपिक में 400 मीटर रेस में पीछे मुड़कर देखा था

वास्तविक फुटेज से पता चलता है कि उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। वास्तव में वह दौड़ की शुरुआत में कुछ समय के लिए पहले तीन धावकों में थे, लेकिन जल्द ही चौथे स्थान पर पहुंच गए। काफी परिश्रम और प्रयासों के साथ उन्होंने चौथा स्थान हासिल किया।

9. यूनेस्को ने विश्व में सर्वश्रेष्ठ राष्ट्रगान के रूप में ‘जन गण मन’ की घोषणा की है

मार्च 2016 में, एक संदेश का दावा करते हुए फेसबुक पर फैलाना शुरू हुआ। यह एक समान अफवाह का पुनरावृत्ति था जो 2008 में उत्पन्न हुआ था और मेल के माध्यम से व्यापक रूप से साझा किया गया था। वास्तव में, मुख्य संपादक, यूनेस्को ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे इस कहानी की रिपोर्ट में भारत के इतिहास के कई ब्लॉगों से अवगत हैं, लेकिन यूनेस्को ने भारत या किसी भी देश के गान से संबंधित ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। भगवान का शुक्र है, इस गलत अफवाह को इतिहास की पुस्तकों में दर्ज नहीं किया गया था।

10. भारत 1947 के बाद से एक धर्मनिरपेक्ष देश रहा है

1947 से भारत धर्मनिरपेक्ष देश रहा है ऐसा कई लोगो का मानना हो सकता है, लेकिन तकनीकी रूप से, 1976 में जब भारत के संविधान में एक संशोधन किया गया था और भारत में ‘धर्मनिरपेक्ष’ शब्द को इसकी प्रस्तावना और अन्य वर्गों में जोड़ दिया गया था, तब से भारत धर्मनिरपेक्षता पर आधारित था।

 

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Harsh Solanki
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